//तेज़ाब

तेज़ाब

By |2020-03-02T11:19:58+00:00February 20th, 2020|Inspiring Story|
अगर जीने का हुनर हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है

ज़िन्दगी को जीने का शोख हो तो इंसान हर हाल में ज़िन्दगी के मुश्किलों से लड़ता है ,

रमेश सिंह के एक बेटी जो बहुत होनहार थी पढ़ने में बहुत तेज थी , नंदू जो बहुत खूबसूरत थी साथ में बहुत सीधी शाधी लड़की थी , रमेश सिंह बेटी से बहुत प्यार करते थे, उनका सपना था बेटी पढ़ लिख कर डॉक्टर बने, नंदू की इक सहेली थी सुजाता जो उसकी खास थी, दोनों साथ में  जाती थी पढ़ने , सुजाता नंदू के घर से कुछ ही दूरी पर रहती थी, रोज की तरह वो लोग स्कूल जा रहे थे , पढ़ने रास्ते में उनके पीछे दो लड़के आने लगे , नंदू सुजाता से बोली कौन हैं ये दोनों और हमारे पीछे कीयुं आ रहे हैं, सुजाता बोली ये लोग मेरे घर के पास ही रहते हैं , उनको तुभी देखी होगी कभी, नंदू नहीं मैंने उनको कभी नहीं देखा घर के आस पास तू कैसे जानती है इन्हें , सुजाता बोली मैं जानती हूं इनको एक का नाम राहुल है एक का नाम रिहान है, दोनों पड़ोसी हैं, नंदू बोली ये हमारे पीछे कियू आ रहे हैं , सुजाता ये जो लड़का है राहुल कल शाम को पीछे वाली गली में मिला था मुझे ये बोला आपसे कुछ बात करना है तो मैं रुकी , ये तुझसे मिलने को बोल रहा था, नंदू बोली मुझसे कियुन मिलेगा मैं इसे जानती भी नहीं , रुक अच्छा मैं पूछ ही लेती हूं , नहीं तो ये रोज पीछे आएगा , नंदू ने राहुल को इशारा किया इधर आओ , राहुल भाग कर नंदू के पास आया , नंदू बोली क्या हुआ क्या बोलना चाहते हो क्या बात है , बोलो , राहुल बोला नंदू तू मुझे बहुत अच्छी लगती है , और मेरा दोस्त तेरी दोस्त को पसंद करता है , नंदू बोली , मुझे ये सब पसंद नहीं मुझे पढ़ लिख कर डॉक्टर बनना है , मेरे पापा का सपना पूरा करना है , राहुल बोला मुझे कोई तकलीफ़ नहीं तुम पढ़ो पर प्यार मुझसे ही करना , नंदू बोली मेरे पापा जिससे शादी करेंगे मैं उससे ही शादी करूंगी , मुझे नहीं पड़ना प्यार के चक्कर में , तुम किसी और लड़की को पकड़ो हम लोगों का पीछा मत करो , सुजाता राहुल को हाथ दिखा कर बोलती है , अब तुम जाओ , नंदू और सुजाता कॉलेज जाते हैं , कॉलेज की छुट्टी हुई तो नंदू को उसकी टीचर ने रोका , नंदू तुम अभी घर मत जाना , मेरे साथ चलना मैं आज अकेली जाऊंगी घर पर , तुम रहोगी तो अच्छा लगेगा मुझे , नंदू अपनी सहेली सुजाता से बोली , तुम जाओ मैं मैडम के साथ आऊंगी , सुजाता बोली ठीक है नंदू , सुजाता घर आ गई , धीरे धीरे काफी रात होने लगा , पर नंदू घर नहीं आई , नंदू के पापा रमेश सिंह घर आए अपनी पत्नी से पूछे , नंदू बिटिया आई नहीं अभी कॉलेज से , नंदू के पापा पाता करो बिटिया रानी कहा है , नंदू की मां है जी रुको मैं पाता करती हूं , नंदू की मां ने नंदू के कॉलेज में फोन किया , पर कोई उठाया नहीं शाम हो गई थी , इसलिए कॉलेज में कोई था नहीं , नंदू की मां नंदू की सहेली सुजाता को फोन किए , नंदू की मां सुजाता बिटिया आज नंदू आई नहीं अभी कॉलेज से वो कहा है तुम्हारे साथ है क्या , सुजाता मा जी नंदू प्रियंका मैडम के साथ आई , वो बोली तू जा मैं मैडम के साथ आती हूं , नंदू की मां बिटिया प्रियंका जी का नंबर है , क्या उनको फोन करती हूं , सुजाता हा चाची मैं देती हूं ,मैडम का नंबर , मां हा बिटिया दो चाची लिखो , सुजाता मां जी को नंबर दी मां जी ने मैडम को फोन किए… हा हेल्लो कौन , मां जी मैं नंदू की मां बोल रही हूं , हा मां जी बोलिए क्या हुआ , मां जी अभी नंदू आई नहीं है , घर पर सुजाता बोली वो आपके साथ आने वाली थी , प्रियंका मैडम , मां जी नंदू को मैं खुद रोड तक छोड़  कर आई थी , मैं बोली नंदू घर तक छोड़ दूं वो बोली मैडम आप जाओ मैं चली जाऊंगी , तो मै उसे छोड़ कर घर आ गई , मां जी , पर वो अभी तक आई नहीं है , ऐसे ही काफी रात रात तक वो आई नहीं , सुबह हो गई नंदू का कोई पता नहीं , नंदू की मां का रो रो कर बुरा हाल हो गया , नंदू के पापा सुजाता को फोन किए , सुजाता बिटिया सुबह हो गई अभी तक नंदू का कोई पता नहीं , सुजाता हा चाचा हमें अब पुलिश स्टेशन जाना चाहिए , चाचा लगता है नंदू किसी बड़ी मुसीबत में है , नंदू के पापा हा बिटिया मुझे भी लगता है , मेरी लाडली किसी मुसीबत में है , बिटिया आओ जरा पूलिश थाने चलो मेरे साथ , सुजाता हा चाचा मैं आ रही हूं , सुजाता और नंदू के पापा थाने में गए , नंदू के पापा साहब मेरी बेटी कॉलेज गई थी , अभी तक वापस नहीं आई , हवलदार अरे चाचा किसी दोस्त के यहां गई होगी , नंदू के पापा नहीं साहब मेरी बेटी बिना बताए कहीं नहीं जाती , आज पहली बार घर पर नहीं पहुंची , नहीं तो मेरी बेटी हर दिन कॉलेज से घर जल्दी आ जाती है , आज वो अपने क्लास टीचर के साथ आ रही थी , उसकी क्लास टीचर बोली वो उसे रोड तक छोड़ कर गई थी , वो वहां से कहां गई किसी को पता नहीं , हवलदार ठीक है बैठो अभी बड़े साहब आ रहे हैं , उनसे बात करना , अभी बेंच पर बैठो काफी समय बाद थाने के इंसपेक्टर आए , राजेश जाधव , महते क्या हुआ ये कबसे बैठे हैं इधर , हवलदार , साहब ये सुबह से आकर बैठे हैं बोल रहे हैं , आपसे मिलना है , राजेश जाधव , ठीक है भेज दो , हा बोलिए क्या बात है , नंदू के पापा साहब मेरी बेटी रोज की तरह कल भी कॉलेज गई थी , पर कल से नहीं आई , साहब वो बिना बताए कहीं नहीं जाती साहब मेरी बेटी किसी मुसीबत में है , मदद कीजिए ये बोल कर नंदू के पापा रोने लगे , इंस्पेक्टर राजेश आप रोइए मत आपकी बेटी को कुछ नहीं होगा आप घर पर जाओ हमें अपनी बेटी का फोटो दो हम छान बिन करते हैं , नंदू के पापा साहब फोटो लाया हूं , नंदू के पापा इंस्पेक्टर को फोटो दिए , फिर सुजाता के साथ घर आ गए , घर आकर अपनी पत्नी को बोले इंस्पेक्टर साहब बिटिया को ढूंढ रहे हैं , नंदू की मां तुम कुछ खा लो कल से कुछ खाई नहीं , नंदू की मां , कैसे खा लूं मेरी गुड़िया ना जाने कैसे होगी ,किस हाल में होगी , नंदू के पापा तुम फिकर मत करो बिटिया जहा भी होगी ठीक होगी , इधर इंस्पेक्टर ने हवलदार से कहा इस फोटो को सभी पूलिश स्टेशन में भेज दो सभी जगह लगा दो लड़की मेडिकल की छात्रा है , अगर जल्दी नहीं मिली तो बात मीडिया तक चली जाएगी , पुलिश डिपार्टमेंट की नाक कट जाएगी , हवलदार ठीक है साहब फोटो सभी थानों में भेज दिया गया , दूसरा दिन हो गया नंदू को गायब हुए , इंस्पेक्टर राजेश , महते कुछ पता चला मेडिकल छात्रा का , हवलदार अभी नहीं साहब पर मैंने सभी जगह फोटो लगा दिया है , इंस्पेक्टर राजेश ठीक है , इतने में फोन बजा इंस्पेक्टर हा हेल्लो मैं इंस्पेक्टर राजेश जाधव बोल रहा हूं , ढकुरली से हेल्लो सर मैं गोपालगंज थाने से हवलदार विनय सिंधे बोल रहा हूं , सर आपके थाने से जो फोटो आया है , ऐसे ही लड़की को गोपालगंज के सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है , जिसपर एसिड अटैक हुआ है , चेहरा काफी जल गया है , पर कपड़े से यही लड़की लग रही है जो फोटो में है , इंस्पेक्टर राजेश महते जल्दी चलो उस लड़की का पता चल गया उसपर किसी ने एसिड डाला है , लड़की की हालत बहुत खराब है , घर वालों को जल्दी बताओ , महते ठीक है साहब , महते नंदू के पापा को फोन किए , आप जल्दी थाने में आओ और अपनी पत्नी और नंदू की दोस्त को लेकर आओ आपकी बेटी बहुत बुरी हालत में है , उसे गोपालगंज के हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है , ये सुन कर नंदू के पापा रोने लगे सुजाता दोनों लोगों को लेकर थाने गई , इंस्पेक्टर राजेश महते तुम इन तीनों को लेकर गोपालगंज थाने पहुंचो , महते ठीक है साहब मैं जाता हूं , आगे की कहानी 2 भाग में

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