देवी

By |2020-02-20T13:04:52+00:00February 20th, 2020|Inspiring Story, People|

“जब मर जाऊँगी तब आइयो मैय्या । तुम काहे फिकर करोगी । हम तो पाये हुए हैं, जने थोड़ी न हैं ।“ सुरेशी एक हाथ में झाड़ू और दूजे हाथ में फ़ोन थामे बड़ी बिज़ी थी । बिटिया का कॉल था ।

अवंतिका बड़बड़ाई, “वैसे ही टाइम पर नहीं आती और उपर से महारानी के फ़ोन कॉल्स !”

“लल्ली, जनी न है तू तो प्रकट हुई है । वैसे अभी तो पापा आये रहे तेरे, प्रकाश की बीवी की पंचायत में । ससुरी काम की न काज़ की । डायन को जाने कौन घड़ी ब्याह लाये थे तेरे बड़े भाई के लिए । नाम पूजा पर काम चुड़ैलों वाले । खैर छोड़ो । इस महीने चार छुट्टी होए रही । अब लाली, होली पे आऊंगी पक्का ।“ सुरेशी लाड़ से बोली ।

“आधे घंटे से क्या छुट्टी की प्लानिंग चल रही है ?” अवंतिका गुस्से से बोली ।

“अरे बीवी जी, देवी की हाथ की हड्डी टूट गयी । साईकल से गिर पड़ी ।“ सुरेशी पोछे का कपड़ा लेने बालकॉनी चली गई । वापस आयी तो बीवी जी को घूरते हुए पाया ।

“हड्डी टूट गयी और तुमको कोई गरज़ नहीं ? और ये प्रकट होने वाली क्या बात थी ?“ अवंतिका ने पूछा । वैसे ये बात उसकी समझ से बाहर थी कि मात्र बारह वर्ष की बेटी को सुरेशी गाँव में अपनी जेठानी के पास कैसे छोड़ आयी । पाँच बच्चों में सबसे छोटी थी देवी । बाकी सब बच्चों की शादी हो चुकी थी ।

“वो एक लंबी कहानी है बीवी जी ।“ सुरेशी पोछा लगाते हुए बोली ।

“सुनें ज़रा हम भी । चाय पियोगी वैसे ?” अवंतिका ने अखबार टेबल में रखते हुए कहा ।

“हम बना लेते हैं ।“ सुरेशी बोली ।

“गुड ! अब सुनाओ ।“ अवंतिका मुस्कुराते हुए बोली । भई, कोई गरमा गर्म अदरक की चाय आपके हाथ में थमाए, इससे अधिक सुकून दिल को कोई और चीज़ नहीं पहुँचाती । बस, शॉपिंग छोड़ कर ।

तो चाय की चुस्कियों के बीच शुरू हुई देवी की कहानी ।

“बीवी जी, नवमी का दिन था । देवी के पापा काम के वास्ते शहर जात रहे । रस्ते में घमाघम बरखा शुरू । पेड़ के नीचे रुके तो कोई दहाड़े मार रोये जाए । देखा, तो नहर के पास बच्ची पड़ी मिली । बस कुछ घंटों की । ये उठा लाये घर । जेठ जी बोले थाने जाना पड़ेगा । पोलिस के पास पहुँचे, रपट हुई तो हमारी विधवा ननद बोल पड़ी, जी हम पालेंगे । ननद के गुजरने के बाद हमने देवी को पाला । अब सकूल में किसी के साथ लड़ाई हुई तो देवी को पता चला कि जनी नहीं है, रस्ते से पायी हुई मिली । तब से अम्मा बनी बैठी है । कर्ज़ा हो गया था बच्चों की सादी पर, तो एक दिन बोली कि कमला भाभी नवेडा में लोगों के घरों में काम करके खूब नोट छाप रही है । तुम जाओ अम्मा, हमारी चिंता न करो । इसके पापा बड़ी मुसकिल से माने । अब हम यहां मजूरी करके कर्जा उतार रहे हैं ।“

“ओह, तो गोद लिया है अनाथ बच्ची को । बड़े पुण्य की बात है ।“ अवंतिका बोली ।

“हाय राम ! गोद न ली । वाने अपना घर चुना, अपने माँ बाप चुने । सारा गाँव आदर करे है, कि जी देवी माँ का हाथ है वाके सर पर । खबसूरत, गुणी, पढ़ने में भी खूब तेज़ । अनाथ बोल कर अनादर न करो । देवी माँ बुरा मान जायेंगी ।“ सुरेशी आँखे पोछते हुए बोली । भर आईं थीं देवी की याद में ।

उधर अवंतिका भारी मन से सुरेशी को देख रही थी । बात बात पर छुट्टी और एडवांस मांगने वाली सुरेशी अब उसे खिज़ा नहीं रही थी । आदर सा आने लगा था ।

“आप हो आओ गांव । काम तो होता रहेगा । बस देवी न बुरा मान जाए वर्ना पाप लगेगा।“ अवंतिका बोली । दोनों खिलखिला कर हँस पड़ीं । अपनत्व भी क्या चीज़ है ! मानो तो सब अपने, न मानो तो सारी दुनिया ही बेगानी है ।

0

About the Author:

One Comment

  1. tellastory March 5, 2020 at 2:05 pm

    Simple story with expressions. Beautifully written!!

    0

Leave A Comment