//दो शर्ते

दो शर्ते

By |2020-02-05T14:23:56+00:00February 5th, 2020|Inspiring Story|

अमूमन मैं, अपने ऑफिस से घर लौट कर आता हूँ., और घर में मेरे दो दोस्त मेरा इन्तजार करते हैं ,मेरा सोफा और टीवी. हम तीनो का याराना एक साल से चल रहा है .

अरे घर कहा क्या मैंने “नहीं ये घर नहीं हैं, ये तो एक ठौर है मेरी जिंदगी का,जहाँ एक साल से अपनी जिन्दगी के फलसफों लिख रहा हूँ मैं. घर तो मेरा वो है  .जिसे मैं छोड़ आया अपने छोटे से शहर की गली में.

एक रोज हमेशा की तरह ऑफिस से आने के बाद  मेरा और मेरे दोनों दोस्तों का याराना चल  रहा था और फिर  दरवाजा पे खट खट हुई.

सोफा बोला- तुम्हारे यहाँ इस वक़्त कौन आएगा?

मैंने तुरंत उठ कर दरवाजा खोला तो सामने एक कमर तक लम्बे बालो वाली  सुर्ख सफ़ेद  सूट में एक लड़की थी. ऐसा लग रहा था,जैसे आज सूरज ने अपनी छटा बिखेर दी हो,मेरे दरवाजे के सामने.

” पर यार वो तो सामने गुप्ता जी के यहा थी”.

सोफा  पीछे से ताना मारते हुए बोला- हाय री ! तेरी फूटी किस्मत.

सोफे की भारी भरकम आवाज सुन ली थी उस लड़की ने  .वो पलटी और गुस्से से मुझे देखने लगी  .मैंने सकबका के दरवाजा बंद कर लिया और अंदर आकर बैठ गया. और मेरा सोफे और टीवी का यारांना चलता रहा, मैं सो गया.

अगले रोज फिर वो आयी. वही  गुप्ता जी के यहा. इस बार उसने गुप्ता जी को गले से लगा लिया था. मुझे थोड़ी बुरा लगा और टीवी ने मेरे मजे लेने सुरु कर दिए.

एक रोज में ऑफिस से जा रहा था  की अचानक सामने से  एक लड़की निकली , वही सफ़ेद सूट वाली लड़की .मुझे देख लिया था शायद  उसने और जाकर एक बूढ़े अमीर आदमी की कार में जाकर बैठ गयी. अगले रोज फिर एक ऑटो वाले के साथ, फिर अगले रोज एक नए लड़के के साथ और फिर अगले रोज एक लड़की से गले लगकर मिल रही थी वो. मन किया की जाकर नाम पूछ लूँ उसका पर वो मुझे देखती और दूर भाग कर किसी से मिलने लगती. फिर कई रोज नहीं मिली.

एक दिन मेरा सोफा और टीवी का याराना चल ही रहा था कि फिर दरवाजे में ख़ट खट हुई.

सोफे ने फिर कहा- तेरे यहाँ नहीं होगी.

मैं उठा, झट से दरवाजा खोला. इस बार कमर तक लम्बे बाल नहीं दिखे थे .मुझे दिखी इस बार सुर्ख काली आँखे चमकता मासूम चेहरा .जी हां इस बार वो मेरे दरवाजे  पर थी.

सोफा बोला- यार इसके पास यही सफ़ेद ड्रेस है क्या?

मैंने सोफे को चुप रहने के लिए कहा. और बोला -जी आप कौन ? उसने कुछ जवाब नहीं दिया, अंदर झांक रही थी. फिर अचानक मुझे रस्ते से हटाया कर बोली- पहली बार तुमसे मिलने आयी हूँ  अंदर तो आने दो.

मुझे धक्का देकर सोफे के साथ बैठ गयी थी वो .मैंने पूछा-आपका नाम क्या है ?कुछ नहीं बोली चुपचाप मेरे घर को देखती रही, फिर बोली-ये घर तुम्हारे उस घर जैसा नहीं है.

–तुम्हे मेरा घर कैसे पता . मैंने शक भरी आवाज में उससे पूछा.

तुम्हारे पापा को जानती  हूँ  मैं ,अक्सर मिलने जाती  रहती हूँ .

मैंने फिर नाम पूछने के लिए अपने ओठ खोले की वो बोल पड़ी- अच्छा सुनो मुझे यहाँ रहना है लेकिन मेरी दो शर्ते  मानोगे तो.

मैंने कहा –जी बिलकुल नहीं.वो न सुन कर भी हस रही थी.मानो मेरे दिल का सारा हाल पता हो उसे.

मेरी टीवी बोली-अरे सुन तो लो,सबकी हेल्प करते हो और हमें भी एक यार मिल जाएगा. बोर हो गए है तुमसे.

मैंने पूछा -क्या है दो शर्ते .

बोली  पहली शर्त- मैं एक लड़के से मोहब्बत करती हूँ . उसके पास कोई घर नहीं है.तुम उसे अपने पास रख लो और मैं भी यही आती जाती रहूंगी.

मैंने तुरंत ही मना कर दिया.

फिर बोली-अरे –अरे,दूसरी  शर्त तो सुन लो वो.

मैंने हां में सर हिलाया तो उसने अपनी दूसरी शर्त बतानी शुरू की.

बोली- जो मेरा मिर्जा है उसका नाम है कर्म. कमब्खत निठल्ला है, कही भी किसी के साथ चला जाता है, जो भी उसे बुलाता है. और मैं उसकी मोहब्बत में पागल, उसके पीछे घूमती रहती हूँ . तुम उसे अपने साथ रख लो  और फिर मैं तुम्हे भी कभी कभी गले से लगा लिया करूंगी चुपके से.

मैं उसे सुन ही रहा था की वो उठी और  बोली- अच्छा चलती हूँ  याद रखना मेरी दो शर्ते.

मैं चुपचाप उसे मुस्कुराता  देख रहा था.

जाते जाते पलट कर बोली- अच्छा  सुनो मेरा नाम “ लोग मुझे प्यार से किस्मत बुलाते है.और याद रखना मेरी दो शर्ते.याद तो रखोगे न..

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