//परिचय

परिचय

By |2020-02-22T15:03:51+00:00February 22nd, 2020|Inspiring Story|
           परिचय
रंग बिरंगी खिड़की से छनती धूप कमरे के फ़र्श पर बिखर रही थी, उस छोटे से कमरे में घड़ी की टिक-टिक और  सहिरा की चहलकदमी की आवाज़ दोपहर की खामोशी को चीर रही थी | पिछले दो घंटे से वो ऐसे ही कमरे का चक्कर लगा रही थी | बैचैन थी शायद, अखिर आज इतने समय बाद उसकी बेटी उससे मिलने आ रही है | पहले तो हर महीने दो तीन बार मिलने आ जाती थी पर अब बड़ी क्लास मे आ गयी है ना तो इसलिए समय नही मिल पाता है, ऐसा सहिरा कहती है | अपनी ही सोच मे गुम सहिरा को दरवाजे पर दस्तक सुनाई दी | उसने दौड़कर दरवाज़ा खोला “तुम्हारे ग्राहक आए है “,आज मै कोई ग्राहक नही लुंगी आज मेरी अपराजिता आ रही है, मूुझसे मिलने के लिए |तभी अचानक कोई उससे आकर लिपट गया, अरे अप्पु आ गयी तू, कब से तेरी ऱाह देख ऱही हूूँँ|”पता है माँ मैैने क्लास में टोप किया है”| अरे वाह, सहिरा आज काफ़ी खुश थी | वो कभी खुद स्कूल नही गयी पर अपनी बेटी को कामयाब हॊते देख कर उसे बहुत सुकून मिलता है, उसे खुशी है कि वो अपनी बेटी को एक अच्छा जीवन दे रही है,जो कि उसका भी अधिकार था| फिर चाहे वो शिक्षा हो या सम्मान |
अक्सर वो अपने खयालो में खो जाती थी, शायद उसे उसके खयालो कि दुनिया असली दुनिया से ज़्यादा खूबसूरत लगती थी |उसकी बेटी ने उसका हाथ पकड़ कर खींचा “ओफ़्फ़ो माँँ कहाँँ खो जाती हो, कितनी बातें करनी है आपसे”| बातें भी करेंगे पर तुझे भूख लगी होगी पहले मै खाना लेकर आती हूँ तू बैठ | बातो ही बातो में  बेटी ने उससे पूछा “माँँ मेरे नाम का क्या मतलब है “| अपरजिता तुम्हारे नाम का मतलब है जो कभी ना हारे पर अगर तुम चाहती हो  कि तुम्हे कोई ना हरा सके तो खुद पर हमेशा विश्वास रखना |और माँ आपकेे नाम का क्या मतलब है, इस एक सवाल ने उसकी पहचान पर हज़ारो सवाल उठा दिये |
दिन बीत गया और साहिरा अपनी बेटी को बस स्टैंड तक छोड़ आइ ,वापस लौटी तो चेहरे पर शिकन थी ओर मन मे वही एक सवाल |
साहिरा एक छोटे से गाँव में पली बढ़ी थी, तीन भाई बहनो में वो सबसे बड़ी थी | सत्रह की उम्र में उसकी
शादी कर दी गई जब वो इस बंधन को समझती भी ना थी | धीरे धीरे वो इस सब में ढल गई | पर कुछ सालो बाद सब कुछ बिखर गया जब बीमारी के चलते उसके पति की मौत हो गयी |उसकी बेटी और उसे कौन पालेगा इस डर से उसके ससुराल वालो ने उसकी बेटी को मारने की धमकी दी है | उस दिन उसने पहली बार अपनी मरज़ी से अपने जीवन का निर्णय लिया, और वहां से भाग गयी| भाग कर वह अपने पिता के घर गयी तॊ उनहॊने भी यह कह उसेे  साथ रखने से मना कर दिया कि घर मे विधवा भाग कर आई बेटी हॊगी तो छोटी बेटी की शादी कसे हॊगी| वहां से भी उसे लौटना पड़ा ,चलती रही ये सोच कर कि रास्ता कही तो ले जाएगा | शहर पहूुन्ची तो वहाँँ के शोर में उसके अंदर का  शोर और भी गहरा होगया | दो दिन तक भूखे प्यासे अपनी सात साल की बच्ची के साथ भटकती रही, इधर-उधर कुछ काम माँँगने के लिए गयी पर सफ़ल ना हो सकी| फिर उसेे सुख्बीर मिला जिसने उसे काम दिलाने का वादा किया और उसे साथ ले गया| उस दिन उसकी ज़िन्दगी ने एक  दूसरा मोड ले लिया पर इस से पहले वो कुछ समझ पाती उसकी ज़िन्दगी बिक चुकी थी | वो धोखेबाज़ आदमि
उसे बीस हज़ार रुपये में कोठे पर बेच गया था, वो जगह जहाँँ होने का उसने सपने में भी नहीं सोचा था |उसने वहां से भागने की कोशिश भी की पर कामयाब
ना हो सकी | वहां की माल्किन ने उसकेे गिडगिडाने 
पर उसके सामने एक प्रस्ताव रखा कि उसके बदले वो अपनी बेटी को वहां छोड़ दे क्योंकि उसके बदले में   उनहॊने पूरी रकम्  चुकाई है, और वो इतने पैसे नहीं दे सकेगी | ये सुनकर उसके पैरो तले ज़मीन खिसक गयी और आखिरकार एक माँ के सामने एक औरत का मान हार गया| सीमा से बदलकर उसका नाम साहिरा रख दिया गया | और वो राज़ी हो गई इस बेढंगी ज़िन्दगी को जीने के लिये | ताकि अपनी बेटी को एक सम्मान भरी ज़िन्दगी दे सके शुरू मे उसकी बेटी पास के एक shelter होम में रहती थी और अब होस्टल में | दोनो काफ़ी कम वक्त साथ बिता पाती है पर एक दूसरे की जिंदगी है दोनो| साहिरा अपनी बेटी को पढ़ा लिखा रही है ताकि उसे एक  सम्मान भरी ज़िन्दगी मिल सके,नौ साल बीत चुके है पर वो जानती  है कि अभी इन्तज़ार और लम्बा है, अभी और भी सफ़र तय करना बाकि है | लेकिन आज उसकी बेटी के एक सवाल ने उसे उसके पूरे सफ़र की याद दिला दी |
बस इसी सोच मे डूबी थी के समय के साथ कितना कुछ बदल गया वो खुद भी , क्या वो भी बदल गयी, नहीं |
बस उसने बद्लाव को महसूस करना बन्द कर दिया, 
उस मासूम सी सीमा को कही दफ़्न करके साहिरा बन गई वो |
क्या पाया उसने? यही के, 
एक माँ केे फ़र्ज़ को निभाने के लिए उसने हर सीमा पार कर दी पर खुद को खोकर |
अपनी बेटी को पहचान दी उसने, पर अपना परिचय गवाँँकर | 
 

0

About the Author:

Leave A Comment