//बंटवारा गहनो का आज भी कुछ याद दिला जाता है

बंटवारा गहनो का आज भी कुछ याद दिला जाता है

By |2020-02-18T10:01:39+00:00February 18th, 2020|Love|

माँ सबकी होती है और माँ से प्यार भी सबको होता है!मुझे भी था।माँ से प्यार के एहसास के लिए उम्र की गिनती नहीं होती। बचपन से शुरू होकर बुढ़ापे तक जाता है।

बुढ़ापे में भी अगर किसी को माँ का प्यार मिल जाए तो जीवन बेहद खूबसूरत लगता है।

credit: third party image reference

मुझे भी अपनी माँ से इतना लगाव था कि एक पल के लिए भी उनके बिना रहना मुश्किल लगता था। सफर आगे चलता रहा और मैं भी काफी बड़ी हो गयी थी। घर में हम तीन बहन और एक भाई था। सबकी शादी हो गई थी। मैं भी कॉलेज में थी और मम्मी की तबीयत भी खराब रहने लगी थी। जैसे कभी बुखार हो जाना और मुंह में छाले हो जाना। पर इन सबके बीच भी मम्मी अपने आपको स्वस्थ बताती थी।

इसी बीच मुझे अपनी पोस्टग्रैजुएशन कम्पलीट करने के लिए दूर जाना पड़ा, तो मुझे याद है कि वो ही अकेली इन्सान थीं जो बहुत ज्यादा ही रो रहीं थीं तब ना जाने क्या खोने के डर से वो इतना रो रही थीं। मैं तो बस हॉस्टल ही जा रही थी। पर दूरी तो दूरी ही होती है।
credit: third party image referenceमुझे हॉस्टल छोड़ने मेरा भाई गया था। उस दिन वो भी बहुत रोया। वक़्त बीतता गया और एक साल बीत गया। मैं भी काफी मेहनत से और लगन से पढ़ाई कर रही थी। पापा भी बहुत खुश थे और मैंने भी अपना टारगेट बना लिया था कि भविष्य में मुझे क्या करना है।सब अच्छा ही चल रहा था कि एक दिन मम्मी के पेट में दर्द होने पर उन्हे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहाँ डॉक्टर ने पित्त की थैली में पथरी बताई, जिसका समय रहते ऑपरेशन भी कर दिया गया, लेकिन डॉक्टर ने ना जाने क्यों ये बोला कि “मुझे ही पता है, मैंने कैसे ऑपरेशन किया है”।डॉक्टर अगर तभी हमें कुछ आइडिया दे देते तो अच्छा होता लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। हालांकि कुछ समय तक मम्मी बिल्कुल ठीक रहीं, पर कुछ समय बाद वो फिर से परेशान सी रहने लगी।मैं जब भी हॉस्टल से घर जाती तो उन्हे कुछ परेशान पाती। पूछने पर वो सब कुछ ठीक ठाक ही बताती और घर की स्थिति देखकर मुझे भी सब कुछ सही ही लगता।
उस ऑपरेशन के कुछ दिन तक वो ठीक रही लेकिन बाद में उसी ऑपरेशन की जगह पर एक गांठ बननी शुरू हो गयी, जिससे हमें थोड़ा शक होने लगा और हमने फिर चेकअप कराया और फिर उस रिपोर्ट में जो आया उसे सुनकर तो हम सबके पैर के नीचे से ज़मीन ही खिसक गई।
रिपोर्ट में कैंसर आया जो अख़िरी स्टेज पर था।
ज़िन्दगी मेरी तो जैसे, थम सी गयी थी और मम्मी को भी कहीं ना कहीं लगता था कि उन्हे कोई गंभीर बीमारी है, इसीलिए एक दिन उन्होने अलमारी में से  भाभी से अपने गहने निकलवाए और मुझसे बोली, “कि ये मेरे गहने है। शायद मैं तेरी शादी में ना रहूं तो कुछ गहने तेरे लिए भी हैं”।

  1. ऎसा बोलकर उन्होने गहनो का बंटवारा किया और कुछ गहने भाभी को भी दिए।
  2. गहनों का वो बंटवारा मैं कभी भूल नहीं सकती।
  • जब भी मैं उन गहनो को अपने सीने तक लटकाती हूं तो लगता है कि माँ ने मुझे अपने सीने से लगाया हुआ है।बंटवारा गहनो का आज भी मुझे बहुत कुछ याद दिला जाता है।
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