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लाइफ आफ्टर कॉलेज

By |2020-02-14T07:24:27+00:00February 14th, 2020|Inspiring Story, Uncategorized|

CHAPTER 1

 

सर्वजीत ! एवरेज हाईट, पतला दुबला शरीर, आँखो पे चश्मा एक बेहद साधारण सा लड़का। तीन साल मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने के बाद अपने सपनों को जीने मुंबई पहुंचा। दिली ख्वाहिश थी कि एक बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फ़िल्म का पोस्टर मुंबई जुहू बीच पे लगा हो, जिसपे बड़े अक्षरों में Directed by Sarvajeet Krishna लिखा हो। जिसे देख कर उससे ज्यादा उसके माता-पिता गौरवान्वित महसूस करे।

बस फिर क्या था, उसने बैग पैक किया और पकड़ ली मुम्बई की ट्रेन। निकलने से पहले कुछ छोटेमोटे प्रॉडक्शन हाऊसेस से बात की थी, जिन्होंने मिलने मुंबई बुलाया था। मगर स्टेशन पे उतरते हीं उसे अहसास हो गया यहां टिकना कितना मुश्किल है। चीटियों के जैसे लोग इधर-उधर रेंग रहे थे, पैर रखने की भी जगह नही थी। खैर ! जैसे तैसे भीड़ से दंगल करते हुए वो बाहर पंहुचा। यहां भीड़ को देखते हुए उसने मन हीं मन सोचा, “मुंबई स्टेशन भी किसी मेले से कम है के।”

 

बाहर देखा तो उसने महसूस किया यहां हर वक़्त ज़िंदगी दौड़ रही है, यहां जो रुक गया वो सबसे पीछे चला जाता है। यहां न जाने कितने लोग आँखो में सपने लेकर आते हैं जो सिर्फ सपने हीं रह जातें हैं, शायद तभी तो इसे सपनो का शहर कहा जाता है। अपना बैग कंधे पे लटकाए वो सड़क के दूसरे किनारे की तरफ चल पड़ा। “टैक्सी”, सामने से आती टैक्सी को हाथ दिखाते हुए वो बोला।

“अंधेरी चलोगे ”

” जी बिल्कुल चलेंगे ”

मन ही मन उस टैक्सी ड्राइवर के बारे मे सोचता हुआ बोला इसे कहीं तो देखा है।

” रोहन भैया हैं ना आप “उत्सुकतावश उसने पूछ हीं लिया।

” हाँ, लेकिन तुम कैसे जानते हो मुझे? “, टैक्सी ड्राइवर हैरान हो कर बोला।

” आप S. Y. कॉलेज दिल्ली में मेरे सीनियर थे ”

“न… नही तो, मै तो मुम्बई से बाहर कभी गया ही नही”, शरम से चेहरा छुपाते हुए टैक्सी ड्राइवर बोला।

हालांकि सर्वजीत समझ चुका था कि ये व्यक्ति झूठ बोल रहा है मगर वो ये नही समझ पाया कि ये झूठ क्यों बोल रहा है। कॉलेज के दिनों में तो ये एक मशहूर फ़िल्म डाइरेक्टर हुआ करते थे, न जाने कितनी शॉर्ट फिल्मे बना डाली थी इन्होने, आए दिन फ़ेसबुक पे इनकी शॉर्ट फिल्मे रिलीज हुआ करती थीं।

 

जो भी हो उसे ये अहसास हो चुका था कि यहाँ सक्सेस होने के लिए सिर्फ पिछवाड़ा घिसाना हीं नही मरवाना भी पड़ता है, उसके बाद भी इसकी कोई गैरंटी नही की आप सक्सेसफुल होंगे।

खैर वो अंधेरी पंहुचा और बजट के अनुसार एक सस्ते होटल मे अपना आशियाना जमा लिया। सफ़र से थकान हो चुकी थी और अगले दिन उसे एक प्रॉडक्शन हाउस में भी जाना था इसलिए फ्रेश हो कर वो सीधे बिस्तर पे गया और गहरी नींद में खराटे भरने लगा।

CHAPTER 2

 

मोबाइल की रिंगटोन से उसकी नींद खुली, आँखे मलता हुआ मोबाइल देखा तो “संजीव खलीफा” स्क्रीन पे फ्लैश कर रहा था। अचानक से कॉलेज के दिनों की यादें ताज़ा हो गई, बकचोदी करने में सबका बाप था ये, सबसे मस्ती करता था और लोग इसकी बकचोदियां एंजॉय भी करते थे। कुलमिलाकर हसने हसाने मे विश्वास रखता था। इसकी सबसे खास बात थी कि ये एक मासूम लड़की का ज़बरा फैन था जिसका नाम था “मिया खलीफा”।

 

” हैलो खलीफा “, कॉल पिक करते हुए सर्वजीत बोला

” साले, #*$@* अब तो बोलना छोड़ दो, उस टाईम नादान थे तो खलीफा पसंद थी,अब लगता है कि देसी इज द बेस्ट “, संजीव बोला

” मतलब “, हैरानी से सर्वजीत ने पूछा

” मतलब अब Sunny Leone “, अपने चिपरिचित भयंकर अंदाज़ में हंसते हुए संजीव बोला।

दोनों तरफ हंसी की लहर दौड़ गई

” तो कहीं बात हुआ कुछ “, गंभीरता से संजीव ने पूछा

” हां एक प्रॉडक्शन हाउस से बात हुआ है, आज बुलाया है देखते हैं क्या होता है ”

कुछ देर तक कॉलेज के दिनों को याद करने के बाद दोनों ने डिसाइड किया कि फोन डिसकनेक्ट कर दिया जाए, जियो तो है नही की फ्री बात हो रही है, पैसे लग रहें हैं और वो भी बाप के नही अपने।

 

जल्दी जल्दी तैयार हो कर वो प्रॉडक्शन हाउस जाने के लिए निकला।

” नाम क्या था उसका, हाँ Viacom 69″ खुद मे बडबडाता हुआ सर्वजीत बोला ।

टैक्सी लेकर वो प्रॉडक्शन हाउस पंहुचा, वहाँ बाहर हीं उसे एक आदमी मिल गया।

“भाऊ गायकवाड़ सर कहाँ मिलेंगे”, सर्वजीत ने उस आदमी से पूछा

“काम क्या है ?”, उसने कड़क आवाज़ में पूछा

“writer हूँ काम के सिलसिले में उन्होंने बुलाया था”

“क्या कहानी है, सुनाओ”

सर्वजीत ने सोचा ज्यादा बहस करना सही नही होगा पता नही किस पोस्ट पे हो। ये सोचकर उसने स्टोरी सुनाना शुरू कर दिया।

“ये कहानी तीन जेनेरेशन की है, जिसमे हर जेनेरेशन की लव स्टोरी है। पहली कहानी होगी अज़ादी से पहले की दूसरी आज की और तीसरी फ्युचर की ”

” मगर अज़ादी के पहले की हीं क्यूँ बाद की क्यूँ नहीं “, उस आदमी ने टोकते हुए बोला।

वो इंसान हर दूसरी लाइन पे बिन मांगे अपना सुझाव दिए जा रहा था जिससे सर्वजीत अंदर ही अंदर खीज चुका था, उसने 10 मिनट सुन कर 105 कट लगा दिए थे स्टोरी में।

तभी पीछे से आवाज़ आई,” वागले गायकवाड़ सर को जल्दी से चाय दे आ”

तब उसे ये अहसास हुआ वो 10 मिनट से एक स्पॉटबॉय को कहानी सुना रहा था जिसने दिमाग की MB कर के रख दी थी।

जब वो अंदर गया तो पता चला सर शूटिंग में बिजी हैं कल आइएगा। जब लौटाना हीं था तो बुलाया क्यूँ, वो बुरी तरह से फ्रस्टेट हो चुका था। खैर कोई दूसरा चारा नही था वो वापस अपने कमरे मे आ गया।

CHAPTER 3

 

जिस कल के बारे में उसे कहा गया था वो पिछले 2महीनो से नही आया था। हर दिन उसे गेट से हीं लौटा दिया जाता था। इस दौरान उसने हर प्रोड्यूसर के दरवाज़े की पेंट देख ली थी। पैसे भी खत्म हो रहे थे और कोई दूसरा काम भी नही मिल रहा था। अब उसे घर लौटना हीं पड़ेगा, एक और सपना इस सपनो के शहर में टूटने वाला था। वो हताशा मे बैठा था कि तभी मोबाइल की रिंगटोन बजी। उसने फोन उठाया तो सामने से आवाज़ आई,

“गायकवाड़ सर ने तुम्हें बुलाया है ठीक 4 बजे पंहुच जाना।”

डूबते को तिनके का सहारा। चलो उम्मीद की की किरण तो दिखी। अचानक से उसे लगने लगा कि जैसे घड़ी के कांटे बढ़ हीं नही रहे।

 

आखिरकार 4 बजा वो viacom69 के प्रोड्यूसर गायकवाड़ के पास बैठा था। उसने स्टोरी सुनाना शुरू किया अभी उसने 15 मिनट भी नहीं सुनायी थी कि प्रोड्यूसर बोल पड़ा,

” ये तुम्हारी स्टोरी तो नॉर्मल लव स्टोरी लग रही है सेक्स अपील कहाँ है”

“सर कुछ लव मेकिंग सीन्‍स भी हैं मगर ये एक शुध्द लव स्टोरी है इसे वलगर नही बना सकते ”

” नही नही फिल्मों में सेक्स तो होना ही चाहिए, आजकल फिल्मे सिर्फ दो S से चलती हैं Sunny और Sex, कुछ स्कोप बनाओ स्टोरी मे तभी कुछ हो सकता है “, प्रोड्यूसर बोला।

हर दूसरी लाइन में उसे सेक्स अपील चाहिए था। सर्वजीत मन हीं मन ख़ुद को कोसने लगा मुझे पहले हीं इस प्रॉडक्शन हाउस के नाम से हीं समझ जाना चाहिए था viacom69… जितनी दफ़ा वो सेक्स अपील की बात कर रहा था सर्वजीत का पारा चढ़ता जा रहा था।

 

खीजते हुए उसने कहा,

” सर मेरे पास एक और आइडिया है, हम मिया खलीफा के लाइफ पे फ़िल्म बना सकते हैं, और इसमे सेक्स अपील की भी भरपूर गुंजाइश है ”

” गुड वेरी गुड, मगर इसमे कौन सी एक्ट्रेस काम करने को रेडी होगी? “, खुश होता हुआ प्रोड्यूसर बोला

” आपकी बीबी हैं ना ! ”

पूरे माहौल में सन्नाटा फैल गया।

” सेक्स अपील, सेक्स अपील इतनी ठरक चढ़ी है तो मेरी मार ले, साला ठरकी “, गुस्से भरे लहज़े मे सर्वजीत बोला

बस फिर क्या था जूते चप्पलों के साथ पूरे इज्ज़त और सम्मान के साथ पूरी यूनिट ने उसे विदाई दी, और गेट के बाहर फेक दिया।

 

आख़िरकार हार मानकर उसने डिसाइड कर लिया कि अब वो वापस लौट जाएगा। जितने भी पैसे बचे थे उन्हे जोड़ कर वो बस स्टैंड की तरफ चल पड़ा। मुंबई स्टेशन की तरफ जाने वाली बस में बैठा, बस मे शाहरुख की फ़िल्म बाज़ीगर चल रही थी। शाहरुख खान बोल रहे थे हार के जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं।

ये सुनकर उसके अंदर एक बार फिर से जोश भर आया। एक बार फिर struggle करने के लिए वो तैयार था। शाहरुख के रईस वाले अंदाज़ में उसने, “आ रहा हूं… फिर से” कहते हुए कदम बस से नीचे की ओर बढ़ा दिए।

 

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I'm an ex Journalist turned writer.